मंगलवार, 25 जुलाई 2017

राख

हाइकु

1)काष्ठ ईंधन
अग्नि धुंआ धमास
राख ही राख।

2)जरा सी चुक
  प्रयास बेशूमार
  हो जाय राख।

3)मृत शरीर
   अग्नि प्रज्जवलित
   राख ही राख।

4)राख अस्थियां
    विसर्जन प्रक्रिया
    हो प्रदूषण।

5) नेहरू राख
    प्रशंसनीय कार्य
    भूमि उड़ाई।
6)जीवन मृत्यु
     सद्कर्म सत्संग
     मिलना राख।
7)राख कहानी
   है दर्द की जुबानी
  न सुने कोई।

#स्वरचित
प्रियंका शर्मा
कुरावर (म.प्र.)
   
  
    
   
 
  
   
   
  
   
   

शनिवार, 22 जुलाई 2017

हाइकु हँसी

1)उदास मन
   पास कोई नही
     जीवन हँसे।
2)खिलती हँसी
    शोभित होंठो पर
    चेहरा खिले।
3)किलकारीयां
    घर आँगन सजे
   सौम्यक हँसी।
4)हँसी ठिठौली
    समय न गंवाए
    बात पते की।
5)दुर्व्यवहार
   प्राकृतिक प्रकोप
   प्रकृति हँसे।
6)क्रोध जो आए
    हर काम बिगाड़े
   दुश्मन हँसे।
7)अंतर करे
   हँसी और मुस्कान
    एक तो नही।
8)बिना बात के
    पागल कहलाए
     जब भी हँसे।
9)हँसी प्रकार
  औ विभिन्न मुद्राएँ
   अर्थ अनेक।
10)बेरोजगारी
     आरक्षण लाचारी
      शिक्षित हँसे।
11)मेरे विचार
      गिरते को संभाले
       कभी न हँसे।
12)हँसी टॉनिक
  जो  रोगी को पिलाए
      रोग भगाए।
13)जान ले तू
     हँसी अनमोल
     जीना सिखाए।
14)सुख-दुख हो
       सदा जो हँसे
       जीवन सजे।
15)मेरा कहना
      यूँ हँसते रहना
      कभी न रोना।
#स्वरचित
प्रियंका शर्मा

रविवार, 16 जुलाई 2017

हिजड़ा

हिजड़ा

आईने पर नज़र पड़ी तो मैं अचकचा गया।विभिन्न मुखमुद्राओं में सुबह वाला हिजड़ा हर दुकान के आगे नाच गा रहा था। लोग उसके नाचने पर पैसे फेंक कर हँस रहे थे।और वो लोगों से वेपरवाह ताली बजाकर नाच  रहा था।एक  घृणा की लहर मेरे चेहरे पर छा गई और मैं पीछे हट गया। "साला हिजड़ा !थू ।"
मैं पीछे मुड़ा तो अब आइने में वो पगली घूमने लगी। फटे चीथड़ों में लोगों की भूखी नजरों से वेपरवाह यहाँ वहाँ घूमती।
"उफ पूरे बाजार का क्या हाल बना दिया है ?कहीं हिजड़ा ,कहीं पगली।कुछ कपड़े उठाकर मैंने उसके तन पर डाल दिये और दुकान के बाहर की जगह में एक फटी चादर डाल दी उसके सोने को।"
अब मैं आइने से नजर हटाकर आँखें बंद कर सोने की कोशिश करने लगा कि नजर फिर आईने पर चली गई। वो गुंडे टाइप लड़के मेरे सामने चले आये उस निरीह पगली को खींचते हुए।मुझसे रूका नहीं गया।
"अरे कहाँ ले जा रहे हो इसे ?इसे बख्श दो पागल है ये।"
"देखो चाचा! सबने दुकान बंद कर दी।बेहतर है तुम भी करो और चलते बनो।"
"नहीं ! मैं तुम्हें ये पाप नहीं करने दूंगा।"
"देखो तुम्हें चाचा कहते हैं हम।दिन रात का आना जाना है बाजार में।नहीं चाहते खून खराबा हो।"उनमें से एक ने चाकू लहराया।
"नहीं बेटा!मेरे बच्चे बहुत छोटे हैं अभी।लेकिन बेटा पाप है ये ।"मरीमरी सी आवाज निकली
"फिर चुपचाप दुकान में चले जाओ।हमें जो करना है करने दो।पाप-पुण्य हम देख लेंगे।लेकिन हमारे हाथ बहक गये तो तुम कल का सूरज नहीं देख पाओगे।"
मैं डर से दुकान का शटर गिरा अंदर बैठ गया।दिल को समझाया क्या लगती है ये पगली मेरी।ऐसी कितनी ही पगली इन लोगों की भेंट चढ़ती होंगी।
और पगली की कातर चीखों से वो सुनसान रात गूँज उठी।
एक झुरझुरी सी आ गई। ठंड में माथे पर पसीने की बूँदें चुहचुहाई। चीखों की गूँज बढ़ती जा रही थी।गला सूख रहा था। मैंने तेजी से  उठाकर पानी पिया, चीखें बढ़ती ही जा रही थीं। मैंने पानी का  गिलास फेंक कर आईने पर दे मारा।आईना टुकड़े-टुकड़े हो गया।मैं चैन की साँस ले आँखें बंद कर सोने की कोशिश करने लगा कि नजर फिर आईने पर चली गई।अब हर टुकड़े में मेरा अक्स विभिन्न मुख मुद्राओं के साथ ताली बजा बजाकर नाचने लगा।मैंने घृणा से मुँह फेर लिया और जोर से चिल्लाया "साला हिजड़ा!थू।"

सोमवार, 26 जून 2017

गजल सीखे मेघा दीदी

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🌷   आइए गजल सीखें   🌷
🌷💐🌷💐🌷💐🌷💐🌷
पूरी पोस्ट एक साथ-

गजल सीखने के लिए जरूरी है कि आपको
१-मात्रा ज्ञान हो।
२-रुक्न (अरकान) की जानकारी हो।
३-बहरों का ज्ञान हो।
४-काफ़िया का ज्ञान हो।
५-रदीफ का ज्ञान हो।
और फिर शेर और उसका मफ़हूम (कथन)।
एवं गजल की जबान की समझ हो।

१- मात्राज्ञान-
💐🌷💐🌷💐

क) जिस अक्षर पर कोई मात्रा नहीं लगी है या जिस पर छोटी मात्रा लगी हो या अनुस्वार (ँ) लगा हो सभी की एक (१) मात्रा
गिनी जाती है.

ख) जिस अक्षर पर कोई बड़ी मात्रा  लगी हो या जिस पर   अनुस्वार (ं) लगा हो  या जिसके बाद क़ोई आधा  अक्षर   हो सभी की दो (२) मात्रा
गिनी जाती है।

ग) आधाअक्षर की एक मात्रा उसके पूर्व के अक्षर की एकमात्रा  में जुड़कर उसे दो मात्रा का बना देती है।

घ) कभी-कभी आधा अक्षर के पूर्व का अक्षर अगर दो मात्रा वाला पहले ही है तो फिर आधा अक्षर की भी एक मात्रा अलग से गिनते हैं. जैसे-रास्ता २ १ २ वास्ता २ १ २ उच्चारण के अनुसार।
ज्यादातर आधा अक्षर के पूर्व  अगर द्विमात्रिक है तो अर्द्धाक्षर को छोड़ देते हैं उसकी मात्रा नहीं गिनते. किन्तु  अगर पूर्व का अक्षर एक मात्रिक है तो उसे दो मात्रा गिनते हैं. विशेष शब्दों के अलावा जैसे इन्हें,उन्हें,तुम्हारा । इनमें इ उ तु की मात्रा एक ही गिनते हैं। आधा अक्षर की कोई मात्रा नहीं गिनते।

च) यदि पहला अक्षर ही आधा अक्षर हो तो उसे छोड़ देते हैं कोई मात्रा नहीं गिनते। जैसे-प्यार,ज्यादा,ख्वाब में प् ज् ख् की कोई मात्रा नहीं गिनते।

उम्मीद है कि आपने अबतक मात्रा गिनने का पर्याप्त अभ्यास कर लिया होगा।
कुछ अभ्यास यहाँ दिए जा रहे हैं।
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शब्द.       उच्चारण.    मात्रा (वजन)
कमल.      क मल.           १२
रामनयन.  रा म न यन.   २११२
बरहमन.     बर ह मन      २१२
चेह्रा              चेह रा         २२
शम्अ.         शमा            २१
शह्र.             शहर.         २१
जिन्दगी        जिन्दगी       २१२
कह्र.             कहर.          २१
तुम्हारा         तुमारा         १२२
दोस्त.           दोस्त.          २१
दोस्ती            दो स् ती      २१२
नज़ारा          नज़्जारा       २२२
                      नज़ारा         १२२
                       नज़ारः        १२१

२- रुक्न /अरकान-
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रुक्न को गण ,टुकड़ा या खण्ड कह सकते हैं।
इसमें लघु (१) और दीर्घ (२) मात्राओं का एक निर्धारित क्रम होता है।
कई रुक्न (अरकान) के मेल से मिसरा/शेर/गज़ल बनती है।।
इन्हीं से बहर का निर्माण होता है।
मुख्यतः अरकान कुल आठ (८) हैं।

नाम🌷         वज़न🌷    शब्द🌷
१-मफ़ाईलुन.  १२२२.   सिखाऊँगा
२-फ़ाइलुन.     २१२.     बानगी
३-फ़ऊलुन.     १२२.    हमारा
४-फ़ाइलातुन.  २१२२. कामकाजी
५-मुतफ़ाइलुन११२१२ बदकिसमती
६-मुस्तफ़इलुन  २२१२ आवारगी
७-मफ़ाइलतुन १२११२ जगत जननी
८-मफ़ऊलात  ११२२१ यमुनादास

ऐसे शब्दों को आप खुद चुन सकते हैं।
इन्हीं अरकान से बहरों का निर्माण होता है।

३-बहर-
💐🌷💐

रुक्न/अरकान /मात्राओं के एक निश्चित क्रम को बहर कहते हैं।
इनके तीन प्रकार हैं-
१-मुफ़रद(मूल) बहरें।
२-मुरक्क़ब (मिश्रित) बहरें।
३-मुजाहिफ़ (मूल रुक्न में जोड़-तोड़ से बनी)बहरें।
बहरों की कुल संख्या अनिश्चित है।
गजल सीखने के लिए बहरों के नाम की भी कोई जरूरत नहीं। केवल मात्रा क्रम जानना आवश्यक है,इसलिए यहाँ प्रचलित ३२ बहरों का मात्राक्रम दिया जा रहा है। जिसपर आप गजल कह सकते हैं, समझ सकते हैं।

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1)-11212-11212-11212-11212

2)-2122-1212-22

3)-221-2122-221-2122

4)-1212-1122-1212-22

5)-221-2121-1221-212

6)-122-122-122

7)-122-122-122-122

8)-122-122-122-12

9)-212-212-212

10)-212-212-212-2

11)-212-212-212-212

12)-1212-212-122-1212-212-22
     -12122-12122-12122-12122

13)-2212-2212

14)-2212-1212

15)-2212-2212-2212

16)-2212-2212-2212-2212

17)-2122-2122

18)-2122-1122-22

19)-2122-2122-212

20)-2122-2122-2122

21)-2122-2122-2122-212

22)-2122-1122-1122-22

23)-1121-2122-1121-2122

24)-2122-2122-2122-2122

25)-1222-1222-122

26)-1222-1222-1222

27)-221-1221-1221-122

28)-221-1222-221-1222

29)-212-1222-212-1222

30)-212-1212-1212-1212

31)-1212-1212-1212-1212

32)-1222-1222-1222-1222
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एक बहर जिसे मात्रिक बहर भी कहते हैं ,हिन्दी गजलकारों ने ज्यादा प्रयोग किया है।
२२ २२ २२ २२
२२२ २२२ २२२ २२२
२२२२ २२२२ २२२२ २२
इत्यादि।

विशेष-१)
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जिन बहरों का अन्तिम रुक्न 22 हो उनमें 22 को 112 करने की छूट हासिल है।
२) सभी बहरों के अन्तिम रुक्न में एक 1(लघु) की इज़ाफ़त (बढ़ोत्तरी)  करने की छूट है। किन्तु यदि सानी मिसरे में इज़ाफ़त की गयी है तो गज़ल के हर सानी मिसरे में इज़ाफ़त करनी होगी.जबकि उला मिसरे के लिए कोई प्रतिबन्ध नहीं है. जिसमें चाहे करें और जिसमें चाहें न करें।
३) दो बहरें
१-२१२२-११२२-२२ और
२-२१२२-१२१२-२२ के पहले रुक्न २१२२ को ११२२ किसी भी मिसरे मे करने की छूट हासिल है।

४) मात्रिक बहरों २२ २२ २२ २२ इत्यादि  जिसमें सभी गुरु हैं ,में -
(क- ). किसी भी (२)गुरु को दो लघु (११) करने की छूट इस शर्त के साथ हासिल  है कि यदि सम के गुरु (२) को ११किया गया है तो सिर्फ सम को ही करें और यदि विषम को तो सिर्फ विषम को। मतलब यह कि या तो विषम- पहले,तीसरे,पाचवें,सातवें,नौवे आदि में सभी को या जितने को मर्जी हो २ को ११ कर सकते हैं। या फिर सिर्फ सम -दूसरे,चौथे,छठवें,आठवें.आदि के २ को ११ कर सकते हैं।
(ख-). २२२ को १२१२,२१२१ ,२११२ भी कर सकते हैं।

कुछ अभ्यास तक्तीअ (गिनती/विश्लेषण) के साथ-
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A-
2122 1212 22
दोस्त मिलता /नसीब से /ऐसा,
2122.          /1212.     /22

जो ख़िजा को /बहार कर/ता है।।
2122.          /1212.     /22

B-
1222 1222 1222 1222
दिया है छो/ड़ उस

रविवार, 7 मई 2017

विवाह

भगवान् ने नर व नारी इस उद्देश्य के चलते थोड़ा थोड़ा अधूरा बनाया है ,ताकि वे आलिंगन करे और इस अपूर्णता को संपूर्णता प्रदान करे।हालांकि ,शताब्दियों से संस्काराग्रस्त होने के चलते पति और पत्नी शब्दो को एक संकुचित अर्थो में बांध दिया है,जिससे इस संबंध की व्यापकता सिमटकर रह गई है ।फिर कभी दोनों माँ की भूमिका निभाए तो कभी पिता की,कभी शरारती बच्चे की,तो कभी समझदार सलाहकार की,कभी शिक्षक की,कभी दर्पण की....तो कभी पति और पत्नी की भी |इस संबंध की परिभाषा को विस्तार दे,खुला रखे,मुक्त रखे।

वैवाहिक संबंध की गरिमा तभी होती है,जब हम अपने जीवनसाथी से समूचे व्यक्तित्व से जुड़े हो,न कि केवल शरीर से।एक दूसरे के सोचने के तरीकों को,व्यतिगत मूल्यों ,दृष्टिकोणों और धारणाओं को समझना जरूरी होता है।एक दूसरे की भावनाओं के प्रति संवेदनशील रहना,परस्पर भावनात्मक अनुकूलता विकसित करना जरुरी है।एक दूसरे के लिए समय निकालना जरुरी है।एक दूसरे के समूचेपन का सम्मान करना,न कि केवल बहरी स्वरूप से।

मानती हूं कि जो दस वर्षों में करने योग्य हो उसे एक ही वर्ष में कर डालने की कोशिश नही करनी चाहिए।और जो एक वर्ष में किया जाना हो ,उसे एक महीने में ही करने की कोशिश नही करनी चाहिए।सब कुछ इतना अतिरेक में नही करना चाहिए कि सम्बन्ध में फिर करने जैसा कुछ रह ही न जाए,परन्तु एक ठन्डे पड़े हुए सम्बन्ध में केवल सह-अस्तित्व में भी नही जीना चाहिए।जो एक वृक्ष बन सकता हो,उसे एक पौधे के रूप में ही मरने नही देना चाहिए।अपितु उस पौधे को प्यार ,विश्वास,और समर्पण से सींच कर एक वृक्ष बनने दे,भलेही धीरे चलो,पर चलो अवश्य और दूर तक चलो।

जीवन में और अच्छे सम्बन्ध में भी,अतीत एक अप्रासंगिक चीज होती है।वर्तमान ही निर्माण शिलाएं बनाता है,भविष्य भी महत्वपूर्ण है,क्योकि हम दोनों को साथ साथ उसी में जाना है।रोज की छोटी छोटी बातों को एकांत में बैठकर चर्चा कर लेने से परस्पर प्रेम को बढ़ाया जा सकता है।एक दूसरे की अभिवृद्धि के लिए अपनी अपनी भूमिका निभाने के किसी ऐसे तरीके को अपनाना चाहिए जो उद्देश्यपूर्ण तो हो,किन्तु हस्तक्षेप करने वाला न हो।

पूरी दुनिया में यह धारणा प्रचलित है कि विवाह का अर्थ है दो शरीर, एक आत्मा। यानी विवाह के बाद जीने के लिए एक ही जीवन रह जाता है,इसका परिणाम यह हुआ कि विवाह के नाम पर स्त्रियों को अपने पति के साए की तरह रहने को बाध्य किया जाने लगा।वे अनुचरी मात्र बन कर रह गई और एक खिन्न,अपने पर तरस खाने वाली और बलि वेदी पर चढ़ी एक ऐसा व्यक्तित्व बन कर रह गई,जो स्वयं को शोषित महसूस कर रहा है।परंतु सच तो यह है कि तुम्हारे और मेरे जीवन के "हमारा" जीवन बनने के बाद भी मेरे और तुम्हारे जीवन का अस्तित्व बना रहता है। विवाह यानी "हमारा"जीवन तो वह स्थान है जहाँ मेरा और तुम्हारा जीवन आकर मिलते है।विवाह में सुखी रहना तो इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों "हमारे"वाले स्थान में किस प्रकार सम्बंधित रहते हैऔर बीते वक़्त के साथ वह स्थान किस प्रकार बढ़ता जाता है।फिर भी,पुरुष और स्त्री दोनों के जीवन का अपना अपना अस्तित्व तो रहता ही है।दरअसल,जब हम अपने अपने स्थान पर जाकर फिर"हमारे"स्थान में लौटकर आते है,तब ही वे दोनों अपने सर्वोत्तम स्वरुप में होते है।इससे यह सुनिश्चित होता हैकि आप एक दूसरे के स्थान का,एक दूसरे की व्यक्तिगत रूचि-अरुचि का और प्राथमिकताओं का सम्मान करते है और सबसे बड़ी बात यह है कि केवल इसी से यह सुनिश्चित होगा कि प्रेम के नाम पर आप एक दूसरे का दम तो नही घोंट रहे है।
अपने सही अर्थों में,विवाह से पति और पत्नी दोनों के जीवन की गुणवत्ता में बढ़ोत्तरी होनी चाहिए।विवाह,दोनों के लिए संभावनाओं का विस्तार करते हुए,जीवन की एक सीधी प्रवाहित धारा हो सकता है और होना भी चाहिए।

गुरुवार, 20 अप्रैल 2017

दुर्गति

शादी के बाद दुर्गति तो
लड़की की होती है लेकिन
घड़ियाली आंसू
बहाता लड़का है !
आज़ादी छिनी
लड़की की लेकिन
ग़ुलामी का ढिंढोरा
पीटता लड़का है !
असली समझौता तो
लड़की करती है
लेकिन खुद को क़ैदी
समझता लड़का है !
लड़की का घर छूटा,
माँ-बाप, भाई-बहन-
सहेलियां छूटीं !
उसकी आज़ादी छिनी-
घूमने की, पहनने की,
नौकरी करने की,
हँसने-बोलने की,
कहीं आने-जाने की !
उसे ग़ुलामी मिली-
खाना बनाने की,
ससुराल में सबकी सेवा की,
डांट-फटकार सहने की
(कभी कभी पिटने की भी),
घर भर के कपड़े धुलने की !
...........और लड़के को
उसको तो घर बैठे
एक नौकरानी मिली,
साथ में दहेज़ भी,
वंश बढ़ाने वाली
मशीन और रोबोट
की तरह बिना तर्क किये
हर सही-ग़लत हुकुम की
तामील करने वाली
एक निजी संपत्ति भी !
शादी के बाद लड़की की
तुलना में लड़कों को
न के बराबर कॉमप्रमाइज़
करना पड़ता है
लेकिन दुनिया भर में
ढिंढोरा लड़के ही
पीटते हैं !
इसलिए
शादी के बाद
अपनी आज़ादी छिनने
का रोना रोने वाले !
सारा दोष
वाइफ़ पे थोपने वाले
संस्कारी मर्दो !
एक बार
दूसरे तरह से भी
सोचके देखो !
फ़र्ज़ करो कि
शादी के बाद तुम्हें
अपना घर,
माँ-बाप,भाई बहन, गाँव,
मित्र सब छोड़ना पड़े;
जींस-टी शर्ट की जगह
साड़ी पहननी पड़े,
घर में बंद रहना पड़े,
खाना बनाना पड़े,
बर्तन-कपड़े धुलने पड़ें,
डांट-फटकार सहना पड़े,
कहीं आने-जाने पे
पाबंदी लग जाए तो
क्या हाल होगा तुम्हारा ?
इसलिए आगे से
दोषारोपण करने से पहले
और
घड़ियाली आंसू
बहाने से पहले
सौ बार सोचना !
अपने पार्टनर को
इंसान समझिये,
मशीन नहीं !
साथी समझिये,
नौकरानी नहीं !
उसका हाथ बंटाइए,
फ़रमान मत सुनाइए !
उसकी आज़ादी
उसे दीजिये, क़ैद नहीं !
प्यार करिए,
दया मत दिखाइए !
अपना सब कुछ
छोड़ के आई है
इसलिए !
तुमसे अधिक आज़ादी,
हक़, बराबरी और सम्मान
डिज़र्व करती है लड़की
ये बात जिस दिन आपके
भेजे में घुस गयी, ज़िन्दगी बहुत
ख़ूबसूरत दिखने लगेगी!

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

चतुष्पदी

चुभन आँखों के रास्ते दिल में उतर जाती है,
बनके लहू फिर वो आँखों से बह जाती है,
दर्द सहकर सदा चुप रह जाने वालों से भी गलतियां हो जाती है,
कभी कभी दिल की बात होठों पर भी आ जाती है।

सोमवार, 10 अप्रैल 2017

बहू

अक्सर लोगों को कहते सुनती हूँ "हमारी बहू बेटी जैसी है". क्या आपने कभी किसी को कहते सुना है कि "मम्मी बिल्कुल पापा जैसी है या पापा मम्मी जैसे हैं "? नहीं, क्योंकि पापा पापा होते हैं और मम्मी मम्मी. उन्हे किसी के जैसा होने की जरूरत नहीं है.  जब हम किसी के जैसा होना चाहते हैं तो अपने अस्तित्व पर ही प्रहार कर देते हैं. सेकंड क्लास सचिन तेंदुलकर बनने से बेहतर है कोई फ़र्स्ट क्लास स्वयं क्रिकेटर बने. बहू बेटी जैसी होनी चाहिए, यह वाक्य बहू की पहचान पर प्रश्न उठाता है. क्या बहू होने मे अपनी कोई खासियत नहीं है जो बेटी जैसा होने का प्रमाण चाहिए? बहू होना क्या इतना बुरा है? कोई यह भी क्यूँ कहता है "हम बहू को बेटी जैसा प्यार देंगे", इसका मतलब बहू जैसा प्यार या तो होता ही नहीं या फिर देने लायक नहीं होता. बहू बहू होती है और बेटी बेटी. इनकी तुलना करना बेबुनियाद है. यह तुलना करके आप संतरे से यह कह रहे हैं कि तू सेब की तरह गुणकारी नहीं हैं और सेब से ये कह रहे हैं कि तू रसदार नहीं है.  बेटी घर मे जन्म लेती है, उसके बचपन की किलकारियों से गूँजता है घर. बहू पराए घर से आती है, अपना बचपन कहीं पीछे छोड़ आती है, वो बेटी जैसी कैसे हो सकती है? और क्यों हो वो बेटी जैसी? बहू होकर ही जब वो बहुत कुछ है तो ऎसी अपेक्षा पर क्यूँ जवाबदेह रहे?  जब वो मुझसे कहते कि मैं बेटी जैसी हूँ मैंने कहा मैं बचपन से तो किसी और की बेटी थी अब अचानक स्टेटस कैसे बदलूँ? मुझे नहीं होना किसी के जैसा, मैं स्वयं मे ही सम्पूर्ण हूँ. अगर  हो सके  तो मेरे बुरे वक्त मे साथ खड़े रहना. मेरी स्वाभाविक कमजोरियों पर हँसना मत. मेरे मातृत्व पर सवाल मत खड़े करना. मुझे बेटी जैसा प्यार मत देना, पर मुझे बहू का सम्मान देना. मुझे बहू का प्यार देना. मैं बहू हूँ और बहू ही रहूँगी. बेटी तो मैं किसी की सालों पहले जन्मी थी, अब यह फिर से तो अगले जन्म मे ही पाएगा.

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2017

Janmdin

मेरे सजना आज आपका जन्मदिन
मेरे लिए सबसे ख़ास दिन
आप प्रियतम हो मेरे मेने प्रीत का बंधन है तुम संग बाँधा
संग साथ रहना मेरे जन्मों जन्म
सांसो का बंधन तुमसे है सच्ची लगन
सौ साल की उम्र तुमको मिले सालो साल ये स्नेह तरोताजा रहे
नाचीज हो इस मन के नूर हो गरिमा के
तुम्ही से है सब कुछ तीर बन गए हो इस दिल के
मोती,हीरा,पन्ना,धन दौलत की परिभाषा हो तुम
इस गरिमा के दिल का सबसे कीमती खजाना हो तुम
टूटने ना दूँगी कभी ये प्यार की लडीया
रूठते मनाते रहेगे और चलती रहेगी ये घड़िया
मेरे अतिप्रिय मेरे अजीज
आपका ममतामयी मान मनुहार एहसास कराता है मुझे पीहर का लाड  प्यार
आपका अपनत्व,धैर्य और अटूट विश्वास
हर पल दिलाता है मुझे जीने की  आस
जीवन के हर उतार चढ़ाव में आपकी सहानुभूति
मेरी जिंदगी के हर लम्हों की है गरिमामयी चुनोती
मेरे प्रति आपका स्नेहिल व्यवहार जिससे अपने घर आँगन में आई खुशियो की बहार
मेरे सजना दरसअल यही तो है मेरा सोलह सृंगार
गौरव इन्ही शब्दों के साथ आपको जन्मदिन की ढेरो बधाई और मेरा खूब सारा प्यार!
Love u Lott ..

शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

अमिताभ

A nice Article by Sir Amitabh Bachchan...
What is the difference between
your mother and wife..
They both LOVE us,
Both SACRIFICE for us,
Both make us EAT
more than we require,
Both make our
house into HOME,
Both PRAY for us,
Both are ALWAYS
there for us,
Both LIVE for us
then why do...
we post/say funny jokes about wife and Laugh & always post respectable quote for mother...The only difference I can see is one brings you into the world... and other makes YOU her world, but men always take their wives for granted & often ignore them in important talks, matters,decisions, Plannings etc...because they think that they are in-efficient to handle them.
Dear men it's True that your mother sacrifices to make you become a Leader but a wife sacrifices to maintain your Leadership...your mother gets your affection and care throughout her Life..but a wife gets your full attention only when she is near the end of her Life...waiting to get your Certification of her soulmate...PleaseV give her importance in early age of her Life so that she can feel that she is not only the Princess of her Father but also the Queen of her Husband.